
फैक्ट्री में ऊष्मा-संबंधी समस्याओं से निपटना
क्या आपने कभी किसी उपकरण के किनारे को छुआ है, और इसकी वजह से अपना हाथ जल गया है? यही समस्या सामान्य इन्फ्रारेड हीटरों में होती है… ऐसे हीटर ऊर्जा को हर दिशा में फैला देते हैं।
सेमीकंडक्टर फैक्ट्रियों में यह एक बड़ी समस्या है… जब मशीनों से निकलने वाली ऊर्जा पूरे कमरे में फैल जाती है, तो न केवल कर्मचारियों को खतरा होता है, बल्कि उपकरणों की कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है।
ऊष्मा को केंद्रित करना
हम इस समस्या से निपटने हेतु दिशात्मक इन्फ्रारेड लैंपों का उपयोग करते हैं… ऐसे लैंपों में परावर्तक एवं विशेष कोटिंगों का उपयोग किया जाता है, जिससे ऊर्जा केवल एक ही दिशा में जाती है… यह ऊर्जा सीधे वेफर तक पहुँचती है।
इस तरह, “अनावश्यक” ऊष्मा कमरे की दीवारों में नहीं जाती… आपको ठीक वहीं ऊष्मा मिलती है, जहाँ आपको उसकी आवश्यकता है… बिना पूरे उपकरण को गर्म होने दिए।
इसका नुकसान
लेकिन इसमें एक नुकसान भी है… चूँकि सारी ऊर्जा एक ही बिंदु पर केंद्रित होती है, इसलिए लैंप का हेड बहुत गर्म हो जाता है… ऐसे में लैंप को ठीक से स्थापित करना आवश्यक है… साथ ही, उपकरण को ठंडा रखने हेतु उचित वायु-प्रवाह आवश्यक है… भले ही कमरे की बाकी दीवारें ठंडी ही क्यों न रहें।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
जब आप दिशात्मक ऊष्मा-व्यवस्था का उपयोग करते हैं, तो आपको आंतरिक दीवारों पर अतिरिक्त इन्सुलेशन लगाने की आवश्यकता ही नहीं रह जाती… ऐसे में पूरी व्यवस्था आसान हो जाती है।
अब आपको अनावश्यक ऊष्मा से लड़ने की आवश्यकता ही नहीं है… ऊर्जा सीधे उसी जगह जाती है, जहाँ काम होना है… इससे उपकरण सुरक्षित रहते हैं, कर्मचारी संतुष्ट रहते हैं, एवं HVAC प्रणाली को भी अतिरिक्त मेहनत करने की आवश्यकता ही नहीं रह जाती।